सेहर
सिगरेट धीरे धीरे सेहर के हाथ में सुलग रही थी। धुँआ हल्के कोहरे की तरह कमरे में जमा हो रहा था। कुछ सोच रहा था कैसे वाणी उसके हाथ से सिगरेट छीन कर फेंक देती थी। " मत पिया करो कैंसर होता है इससे पता है !" उसकी बातों से सेहर मुस्कुरा देता। " जब तुम किसी और की हो जाओगी तो जी कर भी क्या करूँगा ? । इस पर वाणी चुप हो जाती । आज वाणी की शादी है और सेहर कमरे में धुंए के बीच अपने को कोसता है क्यों वो हिम्मत नही जुटा पाया की वाणी को भगा ले जाता!!हिम्मत करता भी तो कैसे उसकी भी तो छोटी जवान बहन है । सेहर और वाणी एक ही ऑफिस में काम करते थे। वाणी के हँसमुख प्रकति से सेहर भी अनछुआ नहीं रहा और दोनों नज़दीक आ गए। दोनों साथ घुमते पिक्चर देखते आने वाले कल की प्लानिंग करते। पर सेहर शादी को लेकर पसोपेश में था। उसकी माँ इस रिश्ते को गवारा नहीं करती और छोटी बहन भी थी जया किसके हाथ पीले करने बाकी थे। वाणी कहती भी - "क्यों न भाग चलें ?" पर सेहर ऐसा नही कर सकता था। समाज उसकी माँ और बेहेन को जीने नही देगा ये बात उसे हर घडी कमजोर करती। सेहर फिर लंबा कश लेकर सोचने लगा...